तैमूर लंग की कहानी, इतिहास, जन्म, परिवार और भारत पर आक्रमण

दिसंबर की सर्द सुबह  है , फिजा में एक अजब सा सन्नाटा है , लगता है जैसे की इस शहर में जैसे कोई रहता नहीं हो | | चारों और लाशों की मीनारें बनी है जिनसे बहते लहू ने मिटटी का रंग भी लाल कर दिया है | बर्बाद हो चुकी इमारते अब भी बता रही है की वो कभी आलिशान हुआ करती थी |  लाशों के बिच खंडर हो चुकी इमारतों से औरतों की चीखने चिल्लाने की आवाज बता रही है की उनकी इज्जत जो कभी सर पर रहा करती थी आज गिरकर धरती में समा गयी है | लग रहा है की जैसे किसी नर्क का दृश्य है | यह जीवित दृश्य है 23 दिसंबर 1398 का और जिस शहर का यह दृश्य है वो शहर है दिल्ली |  आज हम आपको बताने वाले है सबसे क्रूर लुटेरे आक्रमणकारी तैमूर लंग की कहानी जिसने 5 दिन में दिल्ली को शमशान बना दिया था |

तैमूर लंग का जन्म

तैमूर लंग की इच्छा थी की वह भी चंगेज खान की तरह दुनिया फ़तेह करे | और इसके लिए उसने चंगेज खान से भी 2 कदम आगे बढ़कर अपनी क्रूरता से करोड़ो लोगो का नरसंहार किया | तैमूर लंग का जन्म उज्बेकिस्तान के शहर ए सब्र में 6 अप्रैल 1336 में हुआ था |

तैमूर लंग कौन था – राजवंश, धर्म

तैमूर लंग अपने को चंगेज खान का वंशज होने का दावा करता था लेकिन वह एक  तुर्क था और उसने तैमूरी राजवंश की स्थापना की थी | तैमूर के पिता ने इस्लाम धर्म को अपना लिया था इसी वजह से तैमूर इस्लाम धर्म का कट्टर अनुयायी बना | तैमूर का अर्थ होता है लोहा और उसके नाम के साथ जुड़े लंग का मतलब होता है लंगड़े से | एक युद्ध में उसका एक हाथ और एक पैर घायल हो गया था जिसकी वजह से उसका नाम तैमूर लंग पड़ा | 

तैमूर सिकंदर की तरह बनना चाहता था विश्वविजेता

तैमूर बड़ा ही महत्वकांक्षी था वह चंगेज खान की तरह ही क्रूर था और सिकंदर की तरह विश्व विजेता बनने का सपना देखा करता था | तैमूर छोटी उम्र से ही चोरी और लूटपाट करने लग गया था | थोड़ा बड़ा होने के बाद उसने अपना एक गिरोह बनाया और बड़ी लूटपाट करने लगा | सन 1369 में समरकंद के मंगोल शाशक के मर जाने पर उसने समरकंद की गद्दी पर कब्ज़ा कर लिया |  10 साल तक शाशन करने के बाद सन 1380 में उसने इराक पर हमला किया | जहा पर उसने बड़ी क्रूरता से इराक की राजधानी में लाखों लोगो को मारकर उनकी खोपड़ियों के ढेर लगा दिए थे | 1380 से लेकर 1387 तक उसने खुरासान, अजरबैजान, अफगानिस्तान, फारस, सिस्तान और किर्गिस्तान पर आक्रमण कर उन्हें अपने अधीन कर लिया था | 1393 तक उसनेबगदाद से लेकर  मेसोपोटेमिया तक अपना साम्राज्य खड़ा  कर लिया था | 

तैमूर लंग का भारत पर आक्रमण

अब उसका अगला निशाना था हिंदुस्तान | जो की उस समय अपने स्वर्ण और वैभव को लेकर दुनिया भर में प्रसिद्ध था | लेकिन हिंदुस्तान के दुर्गम रास्तो और दुरी को देखते हुए उसके खास सरदार और सिपहसालार हिंदुस्तान पर हमला करने के इच्छुक नहीं थे | लेकिन जब उसने बताया की वह हिन्दू काफिरो को मारकर उनके मंदिरो को नस्ट करके वंहा इस्लामी साम्राज्य खड़ा करेगा तो उसके सिपहसालार राजी हो गए | 

हिंदुस्तान में उस समय सुल्तान महमूद  तुगलक का शाशन था | तैमूर लंग ने सबसे पहले अपने पोते पीर मोहम्मद को आक्रमण के लिए भेजा | उसने 6 महीने की मशक्कत के बाद उस पर अपना अधिकार कर लिया | वह सिंधु, झेलम और रावी नदी पर करता हुआ मुल्तान, तुलुंबा भटनेर जैसे शहरों को तबाह करते हुए आगे बढ़ा | इस दौरान उसने सैकड़ों हिन्दू मंदिरो को तोड़ दिया | वह सैनिकों को क़त्ल करता हुआ उनकी औरतो और बेटियों की इज्जत लुटता हुआ और उन शहरों के नागरिकों को गुलाम बनाता हुआ आगे बढ़ा |

1 लाख गुलामों का क़त्ल किया इस वजह से

जब वह दिल्ली के पास लोनी नगर पंहुचा तब तक उसके पास 1 लाख से अधिक गुलाम थे जिनमे से अधिकांश हिन्दू पुरुष थे | तब उसने सोचा की इन्हे साथ लेकर हमला करने में दिक्कत होगी और अगर इतनी संख्या में लोगों ने विद्रोह कर दिया तो उसे परेशानी आ सकती है | ऐसे में उसने अपने सिपाहियों को आदेश दिया की मुसलमान लोगो को छोड़कर बाकि सभी का क़त्ल कर दिया जाये | और अगर उसके आदेश का कोई पालन ना करे तो उसे क़त्ल कर दिया जाये | ऐसे में उसके सिपाहियों ने अपने तलवारें सूत ली और 1 लाख हिन्दूओ का क़त्ल कर दिया | 

इसके बाद उसने दिल्ली पर हमला किया | दिल्ली के सुल्तान महमूद तुगलक ने अपने 40 हजार पैदल सैनिको , 20 हजार घुड़सवार और 120 हाथियों की सेना से तैमूर लंग से मुकाबला किया | लेकिन सही रणनीति के आभाव में वह युद्ध हार गया और वहां से भाग खड़ा हुआ | इसके बाद जो तैमूर लंग ने वहां क्रूरता का नंगा नाच किया उसको शब्दों में बताना बहुत ही मुश्किल है | वह दिल्ली में 15 दिन तक ठहरा इसमें उसने भयंकर मार काट मचाई | सभी आदमियों को मौत के घाट उतार दिया गया | महिलाओं को और बच्चो को गुलाम बनाकर सैनिको में बाँट दिया गया | मंदिरो को तोड़ दिया गया और सम्पत्तियाँ लूट ली गयी | उसकी इच्छा भारत में शाशन करने की नहीं थी इसलिए उसने वापिस लौटने का मन बनाया | इसके बाद वह मेरठ हरिद्वार में लोगो को क़त्ल करते हुए हिन्दुओं के मंदिरों को तोड़ते हुए 19 मार्च 1399 में वापिस अपने देश लौट गया | 

दुनिया पर फतह का ख्वाब रखता था तैमूर

वतन लौटने के बाद भी उसने 1400 में अंतोलिया और 1403 में ऑटोमन तुर्कों को हराकर अंगोरा पर कब्ज़ा कर लिया | सन 1405 में जब वह चीन पर आक्रमण करने जा रहा था तब उसकी मृत्यु हो गयी | तैमूर ने अपने नेतृत्व में करीब 2 करोड़ लोगों का क़त्ल किया था | जो की उस समय की आबादी का 5 प्रतिशत था | उज्बेकिस्तान के लोग तैमूर लंग को एक हीरो के तौर पर मानते है | 

FAQ

Q.1 तैमूर लंग की राजधानी कहाँ थी ?
Ans . तैमूर लंग की राजधानी समरकंद थी |

Q.2 तैमूर लंग का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
Ans . तैमूर लंग का जन्म 6 अप्रैल 1369 को शहर ए सब्र में हुआ था |

Q.3 तैमूर लंग ने किसके शासन काल में भारत पर आक्रमण किया ?
Ans. तैमूर लंग ने मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत पर आक्रमण किया |

Q.4 तैमूर लंग की मृत्यु कब हुई थी ?
Ans. तैमूर लंग की मृत्यु 1405 में हुई थी |

Q.5 तैमूर की मौत कैसे हुई थी ?
Ans. जब तैमूर चीन पर आक्रमण करने जा रहा था तब जुखाम लगने से उसकी मृत्यु हुई थी |

निष्कर्ष

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