उस दिन की कहानी जब 1 लाख लोगों की हत्या कर लूटा गया दिल्ली को

खून से सनी सड़के चौराहे , घर बरामदे और यहाँ वहां बिखरे शव लग रहा था जैसे कोई नर्क का दृश्य हो | उस दिन सैकड़ो, हजारों को नहीं बल्कि लाखों लोगो को मौत के घाट उतारा गया | उन चमकती शमशीरों ने क्या जवान क्या बूढ़े , क्या औरते क्या बच्चे हर किसी को मौत की नींद सुला दिया | यु तो दिल्ली का दिल हमेशा जख्मो से भरा रहा है | लेकिन यह ऐसा जख्म था जो की कई सदियों तक ना भुलाया जा सकेगा | 

किसने लूटा था दिल्ली को

ईरान के शासक नादिरशाह ने दिल्ली के उस समय के सुल्तान और मुग़ल साम्राज्य के मुहम्मद शाह उर्फ़ रंगीला को हराकर दिल्ली में कत्लोगारत मचाने के साथ ही लूटा था |

नादिरशाह ने क्यों लूटा था दिल्ली को

दिल्ली भारत का दिल है और यही वजह रही की इस पर हमेशा दुनिया की निगाहें रही | और शायद यही वजह रही की इसे पर कब्ज़ा करने और लूटने के इरादे से इस पर कई बार हमले हुए | बाबर ने अपनी छोटी सी टुकड़ी से हिंदुस्तान में मुग़ल साम्राज्य की नीव रखी थी उसे उसके बाद उसके वंशज अकबर और औरंगजेब ने विस्तार किया | लेकिन 1707 में  औरंगजेब के मर जाने के बाद मुग़ल साम्राज्य की नींव खिसकने लगी थी | इसकी एक बड़ी वजह औरंगजेब की कट्टर सोच भी थी जिसकी वजह से उसके कई दुश्मन हो गए थे | और उसकी मौत के बाद दिल्ली दरबार का नियंत्रण ढीला हो गया था |

 कौन था मुहम्मद शाह रंगीला

1719  में मुग़ल साम्राज्य की बागडोर संभाली मुहम्मद शाह ने | मुहम्मद शाह बहुत ही रंगीनमिजाज वाले व्यक्ति थे | उन्होंने औरंगजेब के समय पर गीत संगीत और नृत्य पर लगायी पाबंदियों को हटा दिया था | और उनका पूरा समय गीत संगीत नृत्य और तवायफों के बीच ही गुजरता | इन्हीं रंगीन तबियत के कारन उन्हें मुहम्मद शाह रंगीला के नाम से भी जाना जाता है | जब दिल्ली पर लूट के इरादे से नादिरशाह ने 1739 में दिल्ली की और कूच करना शुरू किया | और इस बात की इत्तला मुहम्मद शाह को दी गयी तो वह तब तक यह ही कहता रहा की दिल्ली दूर है लेकिन जब नादिरशाह पेशावर लाहौर को जीतता हुआ दिल्ली से 100 मील दूर पहुंच गया तब जाकर उसे अपनी सेना का नेतृत्व करना पड़ा |

जहां उनके पहले के मुग़ल सम्राटों ने अपनी पूरी जिंदगी जंग के मैदानों में बिता दी थी | वही मुहम्मद शाह अपने जीवन की पहली जंग लड़ने जा रहा था | उसकी सेना में 2 लाख से अधिक सिपाही , 10 हजार से अधिक घुड़सवार और हाथियों की एक बड़ी फौज थी लेकिन उनमे बड़ी संख्या में कुली, नर्तक,भांड, रसोइये थे | जबकि नादिरशाह की 55000 की फौज में लड़ाके थे | युद्ध हुआ और जीत हुई नादिरशाह की | मुहम्मद शाह को कैद कर लिया गया |

क्यों किया नादिरशाह ने 1,00,000 दिल्ली वालों का क़त्ल

नादिरशाह विजेता की हैसियत से दिल्ली  पंहुचा उसके सम्मान में मस्जिदों में खुतबे पढ़े गए | अभी कुछ ही दिन हुए थे की यह खबर फैली की एक तवायफ ने नादिर शाह का क़त्ल कर दिया | इससे शह पाकर दिल्ली के नागरिको ने नादिर शाह के कई सैनिको का क़त्ल कर दिया | जब यह बात नादिर शाह के कानो में पड़ी तो वह गुस्से से लाल हो गया | वो जिर्रे बख्तर पहन सर पर लोहे का टॉप और अपनी कमर में तलवार डाल अपने घोड़े पर सवार होकर अपने कई कमांडरों और जनरलों के साथ चांदनी चौक की रोशनआरा मस्जिद की और निकला |

वहां उसने मस्जिद में दाखिल होते हुए अल सुबह सूरज की रौशनी में अपनी म्यान में से तलवार को निकालकर चमकाया | यह सन्देश था उसके सैनिको के लिए की अब बिना कोई नियम कायदे के हर किसी को क़त्ल कर दिया जाये | उसके बाद नादिर शाह के सैनिको ने दिल्ली मे बाजारों में , घरों में घुस घुस कर लोगो को मरना शुरू किया | कहा जाता है की इन सैनिको ने एक दिन में करीब 1 लाख से भी अधिक लोगों का क़त्ल कर दिया | हजारों औरतों के साथ बलात्कार किया गया | कई लोगो ने अपनी बेटियों और पत्नियों का इस वजह से क़त्ल कर दिया की कही वे किसी सैनिक के हाथ ना लग जाये | उस दिन इतना खून बहा की सड़के बाजार लाल हो गयी और नालियों में खून बहने लगा | 

यह कत्लो गारत तब रुकी जब मुहम्मद शाह का प्र्धानमंती नंगे पांव और अपनी पगड़ी को हाथ में लिए नादिरशाह के आगे घुटनो पर बैठकर उसने एक शेर पढ़ा |दीगर नमाजदा कासी ता बा तेग नाज कशी मगर कह जिन्दा कनि मुर्दा रा व बाज कशी| जिसका की मतलब था की कोई नहीं बचा ऐसा की जिसे तू क़त्ल कर सके सिवाय इसके की तू  मुर्दे को जिन्दा करे और फिर क़त्ल करे |  तब जाकर नादिरशाह ने अपनी तलवार को म्यान में रखा और तब वो कत्लेआम रुका | इसके बाद शुरू हुई लूट | घरों में जा जाकर नादिर शाह के सैनिको ने लूट मचाई | 10 हजार से भी अधिक औरतो को गुलाम बना लिया गया |

कितनी लूट की थी नादिरशाह ने

इसके बाद नादिर शाह ने महल की और रुख किया | और उसके गुलामों ने महल के खजाने जिसमे हिरे जवाहरात सोना चांदी और ना जाने कितने तरह के रत्न थे उन्हें लुटा गया | नादिर शाह दिल्ली में 56 दिन तक रहा और उसने करीब उस समय के 70 करोड़ रूपए की लूट की  जिनकी आज के समय में उस दौलत की कीमत 10 लाख करोड़ से भी अधिक होती है | 

कोहिनूर कैसे पाया नादिरशाह ने

नादिरशाह जब जाने लगा तो वहां की एक राजदार तवायफ ने उसे बता दिया था की मुहम्मद शाह अपनी पगड़ी में बेशकीमती हिरा कोहिनूर रखता है | ऐसे में नादिर शाह ने एक चाल खेली | नादिरशाह ने मुहम्मद शाह से कहा की अब तुम मेरे भाई जैसे हो और हमारे ईरान में रिवाज है की जब रुखसत होते है तो हम आपस में अपनी पगड़िया बदल लेते है | और ऐसा कह कर उसने अपनी पगड़ी मुहम्मद शाह को पहना दी | अब मुहम्मद शाह को भी अपनी पगड़ी नादिरशाह को पहनानी पड़ी और इस तरह से वह बेशकीमती कोहिनूर हीरा नादिरशाह ले गया | इसके अलावा तख्ते ताउस जिसमे की हजारों हीरे मोतियों से ज्यादा हुआ था उसे भी नादिर शाह लूट कर ले गया | 

ऐसा कहा जाता है की उसने इतना धन दिल्ली से लुटा की उसने अगले 3 सालों के लिए अपनी सल्तनत का टैक्स माफ़ कर दिया और अपने सैनिको को 1 साल का वेतन एडवांस में ही दे दिया | लेकिन इतनी बड़ी लूट के बाद भी वह इस धन दौलत का मजा ज्यादा दिन नहीं ले पाया और 11 जून 1947 को उसके अपने ही अंगरक्षकों ने उसका क़त्ल कर दिया |

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