Google कब बनी, कैसे बनी, मालिक और कारोबार

टेक्नोलॉजी के इस दौर में गूगल एक ऐसा नाम बन गया है जिसने किसी भी तरह की जानकारियों को बस एक क्लीक की दुरी पर लाकर  खड़ा कर दिया है | कभी एक गैराज से शुरू होने वाली यह कम्पनी आज दुनिया का सबसे बड़ा ब्रांड है | गूगल की शुरुआत भले ही एक सर्च इंजन के तोर पर हुई हो लेकिन अब इस  कम्पनी ने भविष्य को देखते हुए कई क्षेत्रो में अपने कदम बढ़ा लिए है | आज इस कम्पनी के सी इ ओ भारतीय मूल के सूंदर पिचाई है | लेकिन क्या आपको पता है कैसे एक छोटी सी शुरुआत से गूगल इतनी बड़ी कम्पनी बनी | तो आइये जानते है गूगल का ये सफर | 

स्टेनफोर्ड कॉलेज में 2 दोस्तों ने बनाया था

गूगल सर्च इंजन के अलावा गूगल मेप, यूट्यूब, पिकासा, जीमेल, जैसी सेवाएं तो उपलब्ध कराती ही है साथ ही अधिकांश मोबाइल फोन का ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर एंड्राइड भी गूगल का ही एक प्रोडक्ट है | गूगल को 2 दोस्तों लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने 1998 में बनाया था | लेरी पेज जो की बचपन से ही कंप्यूटर के शौकीन थे | इनके माता पिता दोनों ही कंप्यूटर विशेषज्ञ थे | यही वजह रही की इनको बचपन से कंप्यूटर के बारे में जानने को मिला | जब लैरी कॉलेज की पढाई के लिए स्टेनफोर्ड कॉलेज गए तो वह इनकी मुलाकात सर्गेई ब्रिन से हुई | ये दोनों ही उस समय स्टेनफोर्ड में पी एच डी के छात्र थे | ये दोनों वर्ल्ड वाइड वेब की लिंक सरंचना पर पी एच डी कर रहे थे | 

गूगोल की गलत वर्तनी से नाम पड़ा गूगल

उस समय सर्च इंजन वेब पेज की रेंक उसके देखे जाने की गिनती पर निर्भर करते थे | लेकिन पेज और ब्रिन को लगता था की यह सही तरीका नहीं है | उन्हें लगता था की एक अच्छा सर्च सिस्टम वह होगा जो वेब पेजों के ताल्लुक का विश्लेषण करें | और उन्होंने इस तकनीक को पेज रेंक नाम दिया | इन्होने अपने सर्च इंजन का नाम गूगल रखा जो की गूगोल की गलत वर्तनी थी जिसका मतलब होता है वह नंबर जिसके 1 के बाद 100 शून्य हो | शुरुआत में इन्होने अपना डोमेन अपने कॉलेज स्टेनफोर्ड की वेबसाइट के अधीन बनाई | और 15 सितम्बर 1997 को इन्होने अपना डोमेन google.stenford.edu रजिस्टर करवाया |

गूगल का पहला ऑफिस था एक गैराज में

इसके बाद 1998 में इन्होने google.ink की स्थापना की | इसका पहला कार्यालय इन्होने अपने दोस्त सुसान वेजस्कि के गैराज मेनलो पार्क केलिफोर्निया में खोला | गूगल की स्थापना से पहले ही माइक्रोसिस्टम कम्पनी के सहसंस्थापक एंडी बेखटोलशिम ने 1 लाख डॉलर की सहायता की |

पढाई की वजह से बेचना चाहते थे गूगल को

आप यह जानकर हैरान रह जायेंगे की लेरी पेज और सर्गेई ब्रिन अपनी पढाई पर पूरा फोकस करने के लिए अपनी कम्पनी को बेचना चाहते थे | और इसके लिए उन्होंने एक्साइट कम्पनी के सी इ ओ जॉर्ज बेल के सामने 10 लाख डॉलर में बेचने का प्रस्ताव रखा था लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया | उस समय एक्साइट कम्पनी के बड़े निवेशक विनोद खोसला ने इसकी आलोचना भी की थी | वह चाहते थे की एक्साइट कम्पनी गूगल को खरीद ले और उसके लिए वे डील को 7,50,000 डॉलर तक ले आये थे लेकिन ये सोदा नहीं हो सका | 

आईपीओ निकालकर अरबपति बन गए लेरी पेज और सर्गेई ब्रिन

7 जून 1999 में क्लीनर पर्किन्स कोफ़ील्ड एंड बायर्स और सिकोइया कैपिटल ने 25 मिलियन डॉलर की फंडिंग की | गूगल कम्पनी बनने के 5 साल बाद इसका आईपीओ निकाला गया | और इसके साथ ही लैरी पेज, सर्गेई ब्रिन और एरिक स्मिट ने यह तय किया की वे 2024 तक साथ मिलकर गूगल कम्पनी का संचालन करेंगे | शेयर आने के साथ ही गूगल का बाजार पुजिकरण 23 अरब डॉलर हो गया | और लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन अरबपति बन गए | 

2007 में किया यूट्यूब का अधिग्रहण

2007 में गूगल ने आज की सबसे प्रसिद्ध ऑनलाइन वीडियो वेबसाइट यूट्यूब को खरीदा | इसके लिए गूगल ने 1.65 अरब डॉलर चुकाए | इस साल गूगल ने डबल क्लीक और ग्रेंड सेन्ट्रल का भी अधिग्रहण किया | 

आज गूगल दुनिया की तीसरी बड़ी कम्पनी है जिसकी मार्किट वेल्यू 766 बिलियन डॉलर है जो की एप्पल और अमेजन के बाद सबसे अधिक है | और इसके मालिक लेरी पेज और सर्गेई ब्रिन दुनिया के 11 वे और 12 वे नंबर के सबसे आमिर व्यक्ति है | 

इसी के साथ उम्मीद करते है की आज का यह लेख आपको पसंद आया होगा अगले आर्टिकल में हम आपको एक और कम्पनी की जर्नी के बारे में बताएंगे | अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर करें | अगर कोई सवाल या सुझाव हो तो कमेंट करें |

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