चंगेज खान का इतिहास

घोड़ों की टापों से उड़ते धूल के गुबार से मानों दिन में भी रात हो गयी है , यह विशाल फौज जिस जगह से भी गुजरती है वहां पीछे सिर्फ बर्बादी का मंजर दिखाई देता है |  खून का सैलाब , टूटी इमारतें, बिखरे सामान के बिच बच गए है कुछ वृद्ध आदमी औरते और छोटे बच्चे | जो अपनी सुध खो चुके है | जिनके बेटों को इस जालिम आताताई ने मौत के घाट उतार दिया है | और छीन ले गये है उनके घरों से उनकी बहुओं और बेटियों को | जिनकी इज्जत तार तार कर उन्हें गुलाम बनाकर ना जाने कितनी बार बेचा जायेगा | साथ ही उनके 8 से 14 साल के बच्चो की भी नीलामी की जाएगी बाजारों में | 

यह भयानक मंजर किसी फैंटेसी फिल्म का नहीं बल्कि असली दृश्य है आज से करीब 1300 साल पहले का | जब पैदा हुआ था वो शाशक जिसने अपनी तलवार को कभी म्यान में नहीं रखा | वह ताउम्र घूमता रहा और फ़तेह करता रहा बड़ी बड़ी रियासतों को | उसके आने की खबर से ही कई राजा अपना राज्य छोड़ भाग खड़े होते थे |

कौन था चंगेज खान

मंगोलिया, चीन से लेकर स्पेन अफगानिस्तान तक अपना राज्य कायम किया था उसका नाम था चंगेज खान | चंगेज खान के नाम से कुछ लोगो को लगता है की वह कोई मुस्लिम राजा होगा लेकिन ऐसा नहीं है | चंगेज खान मुस्लिम नहीं था | उसका असली नाम था तेमुजिन | चंगेज के पिता येशूखेइ एक बहुत बड़े मंगोल कबीले के सरदार थे | चंगेज के पिता के आसपास के तातार कबीले वालों से अच्छे सम्बन्ध नहीं थे | चंगेज की माँ ओरखुनट कबीले से थी जिससे चंगेज खान के पिता येशूखेइ ने भगाकर शादी की थी  तभी से वे भी  उनसे नाराज थे | इसके कारन दोनों कबीलों ने मिलकर येशुखेई के कबीले पर हमला बोल दिया | जिसमे येशूखेइ घायल हो गया और कुछ दिन बाद उसकी मौत हो गयी | 

चंगेज खान के परिवार में कौन कौन था

येशूखेइ की मोत के समय चंगेज खान केवल 12  साल का था | उसके अलावा उसके 3 भाई और एक बहन थी | येशूखेइ की मौत के बाद चंगेज खान का चाचा ओटूला खान मंगोल कबीले का सरदार बना | उसने चंगेज खान के परिवार को मरवाने की कोशिश भी की | लेकिन चंगेज खान की माँ अपने बच्चो के साथ किसी तरह से बच निकली |

कुछ सालो तक जंगल में रहने के बाद जब चंगेज खान बड़ा हुआ तो उसकी माँ ने उसे याद दिलाया की वो येशुखेई का बेटा है उसके हाथ में लाल निशान को दिखाकर वो बोली की उसका जन्म यु जंगल जंगल भटकने के लिए नहीं हुआ है | तब उसने अपनी माँ को यकीं दिलाया की वो एक दिन इस पूरी दुनिया पर राज करेगा | 

बोरजगीन को जीतकर बना चंगेज खान मंगोल कबीले का सरदार

शुरुआत में वो आसपास के इलाकों में छोटी मोटी लूटमार करने लगा | धीरे धीरे उसने अपने साथ आसपास के लोगो को जोड़ लिया और जो भी उस इलाके से गुजरता उनसे वो टैक्स वसूल करने लगा | धीरे धीरे उसने अपना दायरा बहुत बढ़ा लिया था | वह तब तक 20 साल का जवान हो चूका था |

तभी उसे एक सन्देश मिला जो की उसके बचपन के दोस्त जमुखा ने दिया था | जमुखा पास के ही करैत कबीले का सरदार था और उसके पास 25000 की सेना थी | उसने उसकी तरह से लड़ने का आश्वासन दिया | इसके बाद चंगेज खान ने अपनी सारी सेना  इकट्ठी की | और उसने बोर्जगिन की और कूच किया |

जब उसके चाचा ओटूला खान को ये पता चला की चंगेज खान सेना लेकर उस पर हमला करने आ रहा है तो वह बिना लड़े ही वहां से भाग खड़ा हुआ |  और इस तरह चंगेज खान ने बिना लड़े ही बोर्जगिन को जीत लिया और मंगोल कबीले का सरदार बना | 

दोस्त जमुखा के साथ मिलकर लड़ी कई लड़ाइयां

बोर्ज मीन पर जीत में उसके दोस्त जमुखा का बहुत सहयोग था | जमुखा ने ही उसे जिनगीश खान का नाम दिया जो बाद में बदलकर चंगेज खान हो गया | जमुखा और चंगेज खान ने मिलकर बाद में कई लड़ाईया लड़ी और अपने कबीले का विस्तार किया |

चंगेज खान की दिलेरी देखकर उसके जीते हुए कबीलो के सरदारों ने उसे खागान की उपाधि दी जिसका मतलब होता है सबसे बड़ा खान | 

मार्किट कबीला को किया अधीन

एक बार जब चंगेज खान की पत्नी जब चंगेज खान के घर से अपने पिता के साथ उनके घर जा रही थी तब मर्किट कबीले के लोगो ने चंगेज खान के ससुर की हत्या कर उसकी पत्नी का अपहरण कर लिया | जब इस बात का पता चंगेज खान को चला तब चंगेज खान ने मर्किट कबीले पर हमला कर अपनी पत्नी को छुड़ाया और उस कबीले के सभी सैनिको का क़त्ल कर दिया | 

अपनी पत्नी को घर लाने पर उसे पता चला की उसका बलात्कार हुआ है और वो गर्भवती है और उसके पेट में मार्किट कबीले के सरदार का बच्चा पल रहा है | ऐसे में सभी को लगा की चंगेज खान उस बच्चे का क़त्ल कर देगा लेकिन उसने ऐसा नहीं किया | बल्कि मर्किट कबीले में इस बात का सन्देश पहुंचाया की उसकी पत्नी के पेट में उनके कबीले का अंश है जिसे वो मरेगा नहीं बल्कि अपनी संतान की तरह पालेगा | इससे खुस होकर मार्किट कबीला भी चंगेज खान के अधीन आ गया | 

अपने ही दोस्त का क़त्ल किया था चंगेज खान ने

लेकिन जमुखा और करैत कबीला मर्किट कबीले से नफरत करता था | ऐसे में उन्होंने चंगेज खान और उसके कबीले से दूरी बना ली | दोनों ही दोस्तों अपने अपने साम्राज्य को बढ़ने में लग गए और सं 1201 आते आते दोनों ही काफी शक्तिशाली हो चुके थे | ऐसे में जब करैत कबीले ने जमुखा को गुरखान की उपाधि दी तो इससे चंगेज खान नाराज हो गया | गुरखान का मतलब होता है ब्रह्माण्ड का राजा |

चंगेज खान और साथी कबीलो ने जमुखा को ललकारा की वो अगर गुरखान है तो आकर लड़े | इस लड़ाई में जमुखा हार गया और चंगेज खान के सामने बंदी बना कर लाया गया | चंगेज खान ने उससे वापिस मित्रता की बात की और साथ लड़ने को कहा | तो जमुखा ने कहा की जिस तरह एक आसमान में 2 सूरज नहीं रह सकते उसी तरह एक धरती पर 2 राजा नहीं हो सकते | तब चंगेज खान ने उसे मरवा दिया |

अब चंगेज खान का करैत कबीले पर भी आधिपत्य हो गया था | अब वह एक बड़े भू भाग का सरदार बन चूका था | लेकिन दुनिया जितने की इच्छा से उसने 51 साल की उम्र में अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए आस पास के देशो पर हमला किया | 

दुनिया का सबसे बड़ा हत्यारा

चंगेज घुमन्तु जाती से था | उसे शहरी जीवन पसंद नहीं था इसलिए उसने रस्ते में  आने वाले सभी शहरों को रौंद दिया | उसने विरोध करने वाले राज्यों के सैनिकों को मरवा दिया |  बच्चों को गुलाम बना लिया और सुन्दर सुन्दर औरतो को  अपने मनोरंजन के लिए और बाकि औरतों को अपने सैनिकों में बाँट दिया |

वह जीते हुए राजा और सरदारों की पत्नियों और बेटियों की नग्न परेड कराता था और उनमे से जो उसे पसंद आती थी उससे वह या तो शादी कर लेता था या अपनी हवस मिटाता था | ऐसा कहा जाता है की उसने करीब 4 करोड़ लोगों की हत्या की जो की उस समय की आबादी का 11 प्रतिशत थी |  उसकी बर्बरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की उसने ईरान की 75 प्रतिशत आबादी ख़त्म कर दी थी |

उज्बेकिस्तान के बड़े शहर बुखारा और समरकंद को पूरी तरह जलाकर राख कर दिया था |  कहा जाता है की चंगेज खान ने दर्जनों  शादिया की और उससे उसके सैकड़ों बच्चे हुए | और उनके वंश आगे चलते चलते बढ़ता गया |  

चंगेज खान का भारत पर आक्रमण

चंगेज खान के कहर को  भारत के आसपास के सभी देशों को झेलना पड़ा था लेकिन उसने भारत की और कदम नहीं बढ़ाया | जिसकी एक वजह उस समय के भारत पर राज कर रहे इल्तुमिश का एक सही निर्णय भी रहा | जब चंगेज खान ने ईरान पर हमला किया था तो वहां के राजा ख़ारज़म का बेटा जलालुद्दीन भागकर सिंधु नदी तक इल्तुमिश से शरण लेने आया था |

लेकिन इल्तुमिश जानता था की अगर उसने उसे शरण दे दी तो चंगेज खान हिंदुस्तान को रोंदता हुआ निकल जायेगा | ऐसे में इल्तुमिश ने जलालुद्दीन को शरण देने से मना कर दिया | और हिंदुस्तान उस संभावित त्रासदी से बच पाया | 

चंगेज खान अपने सबसे बड़े बेटे जोची को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहता था | लेकिन  उसके दूसरे नम्बर के बेटे चागताई खान ने उसका यह कह कर विरोध किया की वो चंगेज खान का खून नहीं है | तब जोची और चागताई में काफी अनबन भी हुई | तब अंत में चागताई ने कहा की ना ही जोची को और ना उसे बल्कि उनके तीसरे भरी अगताइ खान को उत्तराधिकारी बनाया जाये | तब चंगेज खान ने अगताइ खान को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया | 

चंगेज खान की मृत्यु कब और कैसे हुई थी

चंगेज खान की मृत्यु को लेकर अलग अलग कहानियां है | लेकिन अधिकांश इतिहासकारों का मानना है की 18 अगस्त 1227 को 65 साल की उम्र में घोड़े से गिरने की वजह से गिरने की वजह से वह घायल हो गया था और 18 अगस्त 1227 को उसकी मृत्यु हो गयी थी | 

इसी के साथ हम उम्मीद करते है की आपको आज का यह लेख पसंद आया होगा | अगले लेख में हम आपको बताएंगे एक और क्रूर शाशक के  बारे में जिसने भारत का इतिहास लहूलुहान कर दिया लेकिन उसके नाम पर आज भारत में बच्चो के नाम रखे जा रहे है  जो क्रूर शासक जो करोड़ो लोगों की मौत और ना जाने कितनी औरतो के बलात्कार का जिम्मेदार था उस तैमूर लंग के बारे में | 

FAQ

Q.1 चंगेज खान की कितनी पत्नी थी ?
Ans . चंगेज खान ने अनगिनित शादी की | वह जिस भी राजा से युद्ध करता उसकी बीवी और बेटियों को गुलाम बना लेता था | कहा जाता है उसने सैकड़ों औरतों से शादी की थी |

Q.2 चंगेज खान की मौत कैसे हुई थी ?
Ans. इतिहासकारों के अनुसार चंगेज खान की मौत घोड़े पर से गिर जाने की वजह से हुई थी |

Q.3 चंगेज खान भारत कब आया ?
Ans. चंगेज खान भारत कभी नहीं आया | इस वजह से भारत एक बड़े रक्तपात से बच गया |

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