अंकोरवाट – दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर

हिंदुस्तान यानि की भारत को छोड़कर एक मात्र नेपाल ही ऐसा देश है जहा पर हिन्दू बहुसंख्यक है | किसी समय अफगानिस्तान , ईरान इराक और बर्मा से लेकर मलेशिया तक किसी समय हिन्दू राजाओं का शासन था | लेकिन विदेशी धर्मो के लगातार कई सदियों तक आक्रमण से हिन्दू धर्म सिमटता गया और आज केवल नेपाल और भारत ही ऐसे देश है जिसमे हिन्दू बहुसंख्यक है | 

सुबह  उठते ही मंदिर की घंटिया और मंदिरो से आ रही आरती की सुमधुर आवाज कानों में संगीत की तरह सुनाई देती है | हमारे देश में हिन्दू बहु संख्यक है और पुरे देश में जगह जगह बहुत ही बड़े और भव्य मंदिर बने हुए है लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर भारत नहीं बल्कि किसी और देश में है | और यह कोई हाल ही मनहि बनाया गया है बल्कि इस मंदिर का निर्माण तो कई सदियों पहले किया गया था | आज हम बात कर रहे है दुनिया के सबसे बड़े हिन्दू मंदिर अंकोरवाट के बारे में जो की भारत से दूर कम्बोडिया देश में है |

भगवान विष्णु को समर्पित है अंकोरवाट

अंकोरवाट दुनिया का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर है जो की चारों और घने जंगल और 330 फिट पानी से भरी हुई गहरी खाई से घिरा  हुआ है | अंकोरवाट का मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है | अंगकोरवाट का निर्माण खमेर वंश के शाशक सूर्यवर्मन द्वितीय ने 12 वी शताब्दी में शुरू करवाया था | उनके बाद जयवर्मन द्वितीय ने इसका जीर्णोद्धार करवाया | आज के कम्बोडिया देश को प्राचीन काल में कंबोज देश और कम्पूचिया के नाम से जाना जाता था |

11वी सदी से लेकर कम्बोडिया पर अलग अलग समय पर 27 से भी अधिक राजाओं ने राज क्या | भगवान विष्णु को समर्पित इस मंदिर को लेकर एक कहानी ये है की राजा सूर्यवर्मन देवी देवताओं को खुश कर अमर होना चाहते थे इसलिए उन्होंने यहाँ पर ब्रह्मा विष्णु और महेश की पूजा के लिए ये विशालकाय मंदिर बनवाया था | 

लेकिन बाद के समय में यहाँ पर बौद्धों का आधिपत्य हो गया और यह मंदिर उनके नियंत्रण में आ गया | और यही वजह रही की इस मंदिर में बड़ी मात्रा में बौद्ध मुर्तिया भी है | लेकिन 15 वी और 16 वी शताब्दी में खमेर राज्य पर होने वाले आक्रमणों के कारन यह अध्भुत मंदिर खंडहर में तब्दील हो गया | इसके बाद यह कई सदियों तक जंगलो के बिच गुमनामी में  रहा | 19 वी शताब्दी में एक फ़्रांसिसी पुरातत्ववेता हेनरी महोत  ने इसे खोज निकाला | 

भारत का इस मंदिर के संरक्षण में बड़ा योगदान है

आज यह मंदिर जिस रूप में है उसमे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का बहुत बड़ा योगदान है | वर्ष 1986 से लेकर 1993 तक ए एस आई ने इस मंदिर के सरंक्षण का जिम्मा संभाला था |  इस मंदिर में रामायण और महाभारत काल से सम्बन्धित बहुत सारे दृश्य बड़ी बारीकी के साथ उकेरे गए है | जिनमे सीताहरण, हनुमान का अशोक वाटिका में प्रवेश, अंगद प्रसंग, राम रावण युद्ध मुख्य है | 

इसी के साथ उम्मीद करता हु की आज की यह जानकारी आपको पसंद आयी होगी | अगले लेख में हम ऐसी ही जानकारी आपके लिए लेकर आएंगे | अगर आपको आज का यह लेख पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर करें | अगर कोई सवाल या सुझाव हो तो कमेंट करें |

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